भूमिका जैन "भूमि"

भूमिका जैन "भूमि" कविता मेरा जीवन है

मैं तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ, ख़ुद को मेरे साथ तनहा छोड़ दो। भूमि...
25/03/2026

मैं तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ,
ख़ुद को मेरे साथ तनहा छोड़ दो।
भूमि...

25/03/2026
26/10/2025

काम आई..किसी की..दुआ ही नहीं,
प्यार जैसा कभी कुछ हुआ ही नहीं,
प्यार के....नाम पर...देह.....छूते रहे,
दिल किसी ने किसी का छुआ ही नहीं।
भूमिका "भूमि"

12/07/2025

सावन में कृष्ण...

कृष्ण कन्हैया
बंसी बजैया
रास रचैया
गिरिधारी

एक अकेला
तेरा होना
सबके होने
पर भारी

नाग नथैया
चीर चुरैया
धेनु चरैया
बनवारी

ओ साँवरिया
श्याम सलोने
तेरी महिमा
है न्यारी

सत्य भी तू,शिव,शंकर तू है
शब्द भी तू है,अक्षर तू है
श्री भग्वद्गीता कहती है
प्रश्न हो कोई,उत्तर तू है,

तेरे सिवा कोई और न भाये
ऐसा तुझमें आकर्षण
एक अकेले तुझमें होते
तीनों लोकों के दर्शन

सब ही तेरे
दीवाने हैं
क्या सन्यासी
संसारी

ओ साँवरिया
श्याम सलोने
तेरी महिमा
है न्यारी

तू कालिंदी की कल कल है
गोवर्धन पर्वत अविचल है
तू ही है तुलसी का शालिग
राधे की आँखों का जल है

तू रुक्मणि के पाणिग्रहण में
सखा साथियों का तू है
मीरा का मनमोहन कान्हा,
पिया गोपियों का तू है

ब्रज की रज ही
नहीं अपितु सा-
-री धरती है
आभारी

ओ साँवरिया
श्याम सलोने
तेरी महिमा
है न्यारी

भूमिका जैन "भूमि"

है तुमको सौगंध सिया की, कर देना ये काम, मुझको पार्वती के दूल्हे जैसादूल्हा देना राम। देखो रघुवर उसी मास मैंआई शरण तुम्हा...
07/07/2025

है तुमको सौगंध सिया की,
कर देना ये काम,
मुझको पार्वती के दूल्हे जैसा
दूल्हा देना राम।

देखो रघुवर उसी मास मैं
आई शरण तुम्हारी
श्रावण के जिस मास में उनको
पूजे दुनिया सारी
उनके पास भी जा सकती थी
पर इतना तो सोचो
वर से ही वर कैसे मांगूं
दुविधा है दो धारी

लवकुश से कुछ ध्यान हटाकर
काम को दो अंजाम
मुझको पार्वती के दूल्हे जैसा
दूल्हा देना राम।

भूमिका जैन "भूमि"

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