22/11/2025
विदेशी परिसंपत्तियों के गैर-प्रकटीकरण पर दंड: क्या केवल तकनीकी अनुपालन में कमी दंडनीय परिणामों के लिए पर्याप्त है?
माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट ने Pr. Commissioner of Income Tax (Central)-3 v. Shrem Alloys Pvt. Ltd., आयकर अपील संख्या 391/2024 में दंड संबंधी न्यायशास्त्र में एक महत्वपूर्ण प्रश्न स्पष्ट किया है—क्या केवल निर्धारित प्रारूप (Schedule FA) में विदेशी संपत्ति का उल्लेख न करने मात्र से दंड लगाया जा सकता है, जबकि वह विदेशी संपत्ति पूर्व के रिटर्न, लेखा पुस्तकों में पहले से खुलासा की जा चुकी थी, और बाद में धारा 153A के रिटर्न में दंड कार्यवाही शुरू होने से पूर्व सही रूप से रिपोर्ट कर दी गई थी?
Schedule FA तथा ब्लैक मनी कानून के बाद बढ़ती जांच और सर्च मूल्यांकन की पृष्ठभूमि में यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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1. विधिक पृष्ठभूमि
1.1 धारा 153A — सर्च के बाद पुनर्मूल्यांकन
धारा 153A के तहत, आयकर विभाग द्वारा धारा 132 की तलाशी या धारा 132A के तहत दस्तावेज़ की मांग की स्थिति में, पिछले छह वर्षों के लिए नए रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है। यह रिटर्न धारा 139(1) के रिटर्न के समान माना जाता है।
कोर्ट ने निम्न निर्णय पर भरोसा किया:
PCIT v. JSW Steel Ltd. (2020) 116 taxmann.com 524 (Bom.)
“धारा 153A के तहत दाखिल रिटर्न एक पूर्ण और वैध रिटर्न माना जाएगा तथा इसे धारा 139(1) के तहत दाखिल रिटर्न के समान माना जाएगा।”
यह सिद्धांत इस केस के फैसले में निर्णायक रहा।
1.2 विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण की आवश्यकता
AY 2012–13 से, ITR में Schedule FA के माध्यम से विदेशी संपत्तियों का विस्तृत प्रकटीकरण अनिवार्य है। गैर-रिपोर्टिंग या आंशिक रिपोर्टिंग पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है, और गंभीर मामलों में ब्लैक मनी अधिनियम, 2015 का प्रावधान भी लागू हो सकता है।
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2. मुख्य विवाद
क्या केवल Schedule FA में विदेशी संपत्ति का उल्लेख न करने के आधार पर दंड लगाया जा सकता है, जबकि:
संपत्ति पहले के रिटर्न और खातों में दर्ज थी,
और धारा 153A रिटर्न में दंड नोटिस से पहले सही रूप से रिपोर्ट कर दी गई थी?
CIT(A) और ITAT ने दंड हटाया था, जिसके विरुद्ध विभाग हाई कोर्ट में गया।
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3. प्रस्तुत तर्क
राजस्व (विभाग) का दृष्टिकोण
Schedule FA में रिपोर्टिंग अनिवार्य है।
निर्धारित प्रारूप में चूक भी विधिक उल्लंघन है, अतः दंड योग्य है।
असेसी (करदाता) का दृष्टिकोण
कोई छुपाव या गलत सूचना नहीं थी—संपत्ति:
पुस्तकों में दर्ज,
मूल रिटर्न में घोषित,
153A रिटर्न में स्वेच्छा से सही की गई
चूक तकनीकी थी, जानबूझकर नहीं।
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4. कोर्ट का निर्णय एवं तर्क
हाई कोर्ट ने निचली अदालतों का आदेश बरकरार रखते हुए कहा:
(i) संपत्ति हमेशा घोषित थी
सुसंगत और पारदर्शी प्रकटीकरण था—कोई छुपाव नहीं।
(ii) दंड नोटिस से पहले स्वैच्छिक सुधार
यह bona fide आचरण दर्शाता है, न कि कर चुराने का उद्देश्य।
(iii) धारा 153A रिटर्न पूर्ण अनुपालन है
JSW Steel केस का संदर्भ देते हुए कहा कि 153A रिटर्न धारा 139(1) के समान है।
(iv) मात्र तकनीकी चूक पर दंड नहीं
कोर्ट ने कहा:
“सिर्फ प्रारूप में रिपोर्टिंग की कमी के आधार पर दंड नहीं लगाया जा सकता, जब वास्तविक प्रकटीकरण पहले से मौजूद है और चूक दंड कार्यवाही से पहले सुधार ली गई।”
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5. निर्णय
कोई गलत सूचना या छुपाव नहीं था।
त्रुटि मात्र तकनीकी थी, बाद में सुधार ली गई।
कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं बनता।
अतः दंड सही रूप से हटाया गया।
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निष्कर्ष
यह निर्णय एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को पुनः स्थापित करता है:
दंड कानूनी रूप से दंडात्मक है, और केवल तकनीकी या प्रक्रियागत कमी पर लागू नहीं किया जा सकता, जब पूर्ण वास्तविक अनुपालन और छुपाने की मंशा का अभाव हो।
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